प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें भावपूर्ण पत्र लिखकर शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को ‘राष्ट्र-शिल्पी’ बताते हुए उनके स्वस्थ, दीर्घायु और मंगलमय जीवन की कामना की। पत्र में धामी ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व, राष्ट्र निर्माण में योगदान और उनके साथ हुई पहली मुलाकात की यादों का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने पत्र की शुरुआत श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ से की। उन्होंने लिखा कि फल की आसक्ति से मुक्त होकर लोक कल्याण के लिए समर्पित होना ही वास्तविक तपस्या है। महात्मा बुद्ध, आचार्य चाणक्य, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और बाबासाहेब आंबेडकर से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक अनेक महापुरुषों ने भारत के नवनिर्माण में योगदान दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री की साधारण पृष्ठभूमि से देश के शीर्ष नेतृत्व तक की यात्रा को प्रत्येक देशवासी के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।
पहली मुलाकात की यादें कीं साझा
धामी ने पत्र में लिखा कि जब संगठन ने उन्हें पहली बार उत्तराखंड के मुख्य सेवक का दायित्व सौंपा था, तब नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधानमंत्री से पहली भेंट के दौरान उनके मन में उत्साह के साथ संकोच और थोड़ा डर भी था। प्रधानमंत्री ने अत्यंत आत्मीयता से उन्हें अपने पास बिठाया। मुख्यमंत्री ने लिखा कि प्रधानमंत्री का हृदय बरगद की भांति विशाल और सागर की तरह गहरा है, जिसमें सभी नागरिकों के लिए समान करुणा और कर्तव्य का भाव है।
योजनाओं और पहलों का किया उल्लेख
पत्र में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री की विभिन्न योजनाओं और पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि सैनिक कल्याण, वृद्धावस्था पेंशन और आयुष्मान कार्ड जैसी नीतियों से समाज के विभिन्न वर्गों को संबल मिला है। कौशल भारत, स्टार्टअप इंडिया और मुद्रा योजना ने युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाए हैं। परीक्षा पे चर्चा, युवा संवाद और पीएम श्री स्कूलों के माध्यम से प्रधानमंत्री युवाओं के मार्गदर्शक बने हैं।
महिला सशक्तीकरण के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम, लखपति दीदी, उज्ज्वला योजना और जनधन खातों का उल्लेख किया। किसान सम्मान निधि के माध्यम से अन्नदाताओं को आर्थिक संबल मिलने की बात भी पत्र में कही गई है।
रामायण के प्रसंग से बताया कार्यकर्ताओं का संबल
मुख्यमंत्री ने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए लिखा कि भगवान राम ने सुग्रीव को संरक्षण देकर किष्किंधा के शिखर पर प्रतिष्ठित किया था। उसी तर्ज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी साधारण कार्यकर्ताओं को संबल प्रदान किया है। उन्होंने ऋग्वेद के सूक्त ‘समानी व आकूतिः, समाना हृदयानि वः’ का उल्लेख करते हुए लिखा कि आधुनिक भारत में एकता और समान संकल्प की भावना को प्रधानमंत्री ने चरितार्थ किया है।
धामी ने प्रधानमंत्री को समूचे राष्ट्र का सजग अभिभावक बताते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। पत्र के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और मंगलमय जीवन की कामना की।